सदाबहार रेखा: अमिताभ बच्चन के साथ ने दी इनके करियर को उड़ान

सदाबहार रेखा: अमिताभ बच्चन के साथ ने दी इनके करियर को उड़ान

Photo Credit by- Jagran

मुंबई:  सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने इस साल अपना 64 वां जन्मदिन मनाया। 10 अक्तूबर 1954 को जन्मीं रेखा ने महज 15 साल की उम्र में बॉलीवुड में एंट्री कर ली थी। रेखा के बचपन का नाम भानुरेखा गणेशन था। पिता जेमिनी गणेशन भी जाने माने अभिनेता थे। हालांकि, रेखा की मां पुष्पावल्ली और जेमिनी गणेशन की शादी नहीं हुई थी। बहरहाल, 12 साल की उम्र में रेखा ने बतौर बाल कलाकार तेलुगू फ़िल्म ‘रंगुला रतनाम’ से अभिनय की शुरुआत की थी। जबकि रेखा की बतौर अभिनेत्री पहली हिंदी फ़िल्म ‘सावन भादो’ थी। उस समय रेखा काफी मोटी दिखती थीं और उनकी अदाओं में वह जादू भी नहीं था जो उनके अभिनय को देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों तक चले आते। लेकिन, रेखा ने अपने आप को समय के साथ ढाला और वो मुकाम हासिल किया जो शायद ही किसी और अभिनेत्री को हासिल हुआ है।अमिताभ बच्चन का साथ मिलते ही रेखा का फ़िल्मी करियर उड़ान भरने लगा मानो अमिताभ उनके लिए किस्मत की लॉटरी लेकर आए हों। प्रकाश मेहरा की ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में रेखा और अमिताभ की जोड़ी ने पहली बार शोहरत के आसमान को छुआ और फिर देखते ही देखते इस जोड़ी ने हिन्दी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया था। रेखा और बिगबी की खूबसूरत जोड़ी ने हिन्दी सिनेमा को ‘उमराव जान’, ‘सिलसिला’, ‘सुहाग’ और ‘मिस्टर नटवरलाल’ जैसी कई सुपरहिट फ़िल्में दीं। कहते हैं कि हिन्दी सिनेमा में रेखा से पहले किसी भी अभिनेत्री के लिए बोल्ड और सेक्सी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता था पर इन्होंने सेक्सी शब्द की परिभाषा ही बदल दी थी।  साल 1984 में आए फ़िल्म ‘उत्सव’ में रेखा का बोल्ड अवतार नज़र आया था जिसे देखकर लोगों ने अंदाजा लगा लिया था कि यह एक्ट्रेस फ़िल्मी दुनिया में काफी ऊंची उड़ान भरेगी। साल 1996 में अंग्रेजी फ़िल्म में कामसूत्र टीचर के रूप में नजर आकर रेखा ने सबको चौंका दिया। यूं तो रेखा ने बहुत सी शानदार फ़िल्मों में काम किया लेकिन, जिन फिल्मों में रेखा का जादू सर चढ़ कर बोला वह थीं ‘उमराव जान’, ‘खूबसूरत’, ‘सिलसिला’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘खून भरी मांग’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ आदि। ‘उमराव जान’ में रेखा का अभिनय अपने शिखर पर था। इस फ़िल्म में उनके नृत्य कला की सबने तारीफ की। ‘खूबसूरत’ के लिए रेखा को पहली बार फिल्मफेयर की तरफ से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब मिला। ‘सिलसिला’ में रेखा ने अपनी लाइफ़ को पर्दे पर उतारने का सबसे मुश्किल काम कर दिखाया।

एक पूर्व प्रेमिका के दर्द को आंखों में उन्होंने इस कदर उतारा कि लोगों को ‘सिलसिला’ एक फ़िल्म नहीं एक सच्ची कहानी लगने लगी। सिर्फ लीड हीरोइन ही नहीं रेखा ने कई निगेटिव रोल भी निभाए जिनमें ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ अहम थी। मदमस्त आंखें और कातिल अदाओं की मलिका रेखा का जादू आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। रेखा अपनी ख़ास अदा और कलाकारी के लिए आज भी कई अभिनेत्रियों की प्रेरणा बनीं हुईं हैं।

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