बर्थडे स्पेशल: अपने प्यार सुरैया से अलग होने पर पूरी तरह टूट गए थे देवानंद!

बर्थडे स्पेशल: अपने प्यार सुरैया से अलग होने पर पूरी तरह टूट गए थे देवानंद!

Photo Credit by- Zee News

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर देवानंद को यूं तो किसी परिचय की जरूरत नहीं है. वह हमेशा से ही लड़कियों के फेवरेट रहे हैं. कहा जाता है, उन पर लड़कियां जान छिड़कती थीं और उन्हें सफेद शर्ट काले कोर्ट में देख कर लड़कियां चक्कर खा कर गिर जाती थीं. इस वजह से कोर्ट ने उनके काले कोट पहनने पर बैन लगा दिया था, ताकि उनकी खूबसूरती को देख लड़कियां आत्महत्या न करें. हालांकि, देवानंद का दिल तो एक्ट्रेस सुरैया पर आया था. यहां तक कि उनकी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में सुरैया का जिक्र है. अपनी किताब में देवानंद लिखते हैं, ‘काम के दौरान, हम दोस्त हो गए और फिर गहरे दोस्त, गहरे दोस्त से प्रेमी. सबको पता चल गया और वैसे भी प्रेम कहानी कहां छुपती है. एक दिन भी ऐसा नहीं था, जब बिना बात किए रहा जाए. कभी आमने-सामने, तो कभी फोन पर घंटो बातें होती रहती थी’. बता दें, देवानंद पहली बार सुरैया से फिल्म ‘विद्या’ के सेट पर मिले थे.

देवानंद ने अपना परिचय देते हुए कहा, लोग मुझे देव कहते हैं, आप मुझे किस नाम से बुलाना पसंद करेंगी? इस पर सुरैया ने मुस्कुरा कर कहा- देव.देवानंद ने बताया, ‘मुझे सुरैया से प्यार हो गया था, लेकिन एक परेशानी थी. वह उनकी नानी थी. उनकी नानी के कहे बिना उनके घर का पत्ता भी नहीं हिलता था और जैसा हर प्रेम कहानी में होता आया है, कोई न कोई विलेन आ ही जाता है. मैं जब भी सुरैया के घर जाता तो उनको अच्छा नहीं लगता. मेरा पहले की तरह स्वागत नहीं होता, लेकिन जैसे-जैसे लोगों कों हमारा मिलना नागवारा होता गया वैसे-वैसे हमारे बीच प्यार की तड़प भी बढ़ती गई’.

मुझे सुरैया को देखे बिना चैन नहीं मिलता. दोनों के लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो गया. सुरैया के परिवार ने हमारे प्यार पर पाबंदियां लगा दीं और मिलने-जुलने पर भी रोक लगा दी. एक इंटरव्यू में देवानंद ने कहा था, सुरैया एक बड़ी एक्ट्रेस थी और हमेशा लोगों से घिरी रहती थीं. उनसे मिलने के लिए मुझे काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी. एक दिन हम छुपके से एक पानी की टंकी के पास मिले और सुरैया ने मुझे गले लगा कर कहा- आई लव यू. इसके बाद मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मैंने सोच लिया कि अब ऐसे नहीं चलेगा. मैंने फौरन सगाई के लिए अंगूठी खरीदी, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि उसने मेरी अंगूठी पानी में क्यों फेंक दी. हालांकि, मैंने सुरैया से कभी इस बारे में नहीं पूछा. दो प्रेमी अलग हो गए, मजहब की दीवार ने दो प्यार करने वालों को दूर कर दिया. इसके बाद दोनों ने एक साथ कोई फिल्म नहीं की. न कभी मिले. सुरैया ने पूरी जिंदगी किसी से शादी नहीं की. अपनी बुक में देवानंद ने अपनी प्रेम कहानी का बेहद खूबसूरती से जिक्र किया है. उन्होंने लिखा, पहले प्यार का अहसास ही अलग होता  है.

देवानंद ने एक इंटरव्यू में कहा, आप खुद बताइए, एक लड़का, एक लड़की से बेइंतहा महोब्बत करता है और उससे शादी करना चाहता है, लेकिन जब वह बेबस होकर आपसे कहती है, मेरा परिवार, मेरे रिश्तेदार, मेरी नानी, मेरा धर्म… तो आप क्या करेंगे. देव ये बात बोलते वक्त चुप हो गए, उनकी खामोशी ही उस वक्त सब बयां कर रही थी. उन्होंने कहा, उस दिन मैं बहुत रोया, मैं अंदर से टूट चुका था, लेकिन मैंने अपने आप को संभाला. इसके बाद मैं कभी सुरैया से नहीं मिला. हालांकि, मैंने एक दो बार पार्टीज में उसे देखा. मुझे पता चला कि उसने कभी शादी नहीं की.

फिर एक दिन मेरे पास किसी का फोन आया और उसने मुझे बताया कि सुरैया अब इस दुनिया में नहीं रही. यह सुन कर मुझे बहुत दुख हुऐ. कई बार ऐसा होता है आप अपना दुख जता नहीं पाते. मैं उसे अंतिम समय में देखने भी नहीं गया. अगर जाता तो लोगों को बातें बनाने का एक और मौका मिल जाता. एक हेडलाइन मिल जाती, लोग मेरी तस्वीर लेते और वो सबके लिए मजे की बात बन जाती. वो मुझसे सवाल करते, मैं क्या कहता? वह सुंदर थी. अच्छा गाती थी… मैं उनसे प्यार करता था… इतना काफी था. मैं चुपचाप बैठ गया उदास था, लेकिन वह इन सब दुखों से आजाद हो गई, वह तो अब चली गईं इस दुनिया से, लेकिन किसी के जाने से जिंदगी कहां रुकती है.

देवानंद ने 1954 में अपनी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अपनी सह-कलाकार कल्पना कार्तिक से शादी कर ली थी. अपनी शादी के बारे में उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया. हालांकि, उनकी यह शादी ज्यादा वक्त तक नहीं चली. उनके दो बच्चे हैं सुनील आनंद और देविना आनंद. देविना वही नाम है जो देव और सुरैया ने अपनी बेटी के लिए सोचा था. देवानंद अपनी जिंदगी के उस पड़ाव पर पहुंच गए थे. देव अक्सर अपनी उम्र के बारे में बात किया करते थे, वह हमेशा जवां रहेंगे. यूं तो दुनिया उन्हें रोमांटिक हीरो के तौर पर जानती है लेकिन असल में उनका रोमांस अपनी किताब से है, विचारों से है. वह अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों तक काम करते रहे और 3 दिसंबर 2011 को चुपचाप दुनिया को अलविदा कह कर हमेशा के लिए चले गए.

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